लखनऊ “मुस्लिम गर्ल्स हॉस्टल” को मदरसा बताकर बदनाम करने का पूरा सच आया सामने

भारतीय मीडिया ने एक बार फिर से नीच हरकत करते हुए पूरे मुस्लिम समुदाय को शर्मसार करने की कोशिश की है. और इसमें इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया दोनों ही शामिल है. इन दल्लों को एक ‘गर्ल्स हॉस्टल’ ‘मदरसा’ नजर आ जाता है. और एक ही दिन में पूरे भारत में इतना हो हल्ला मचा दिया जाता है जैसे दिन दहधे कोई घर में घुसकर इनकी बहन बेटियों को उठा ले गया. क्यों रे दलालों अब तक हजारों की संख्या में गैर मुस्लिम लड़कियों के जो हर रात बलात्कार हुए हैं तुमने कभी इन बाबाओं के बारे में डिबेट क्यों नहीं की ?

अब तो इनकी संख्या इतनी पहुँच गयी है के नाम भी गिनने मुश्किल हुए जा रहे हैं, और भक्तों क्यों बे इनको जलाने के लिए कोई शम्भूलाल अभी तक क्यों नहीं आया ? फर्जी राष्ट्रवादियों कहाँ लुल हो गयी तुम्हारे मर्दानगी ? क्या अब धरने और प्रदर्शन नहीं करोगे ? डियर इंडियन दलाल मीडिया जब तक हमारे ‘सोशल एक्टिविस्ट’ नौजवान साथी सोशल मीडिया में एक्टिव है तब तक तुम्हारे नापाक इरादों को कभी भी कामयाब नहीं होने देंगे.

चलिए आते हैं अब मुद्दे की बात पर, हमारी भारतीय मेनस्ट्रीम मीडिया कभी भी खबर की पड़ताल करने की कोशिश नहीं करती खास तौर से जब मामला मुस्लिम समुदाय से जुड़ा हो तब, इन मीडिया के कुछ बिकाऊ दलालों की ऑंखें खोलने के लिए इस पोस्ट को डाला गया है. यह बताना जरूरी है कि जिस ‘गर्ल्स होस्टल’ को ये मदरसा कहकर ख़बरें चला रहे हैं, और वहां से इनकी ख़बरों के अनुसार लड़कियों को ‘रेस्क्यू’ करके निकला क्या वहां पर लड़कियों को हथियारबंद गुंडों ने कैद कर रखा था ? या उन लड़कियों को बंधक बनाकर रखा गया था ?

आपकी जानकारी के लिए बता दें इसी मीडिया ने ;दलाल मीडिया’ ने ‘अरब देश’ की तीन बड़ी कंपनियों की मालिक एक  मुस्लिम महिला को ‘क़तर की राजकुमारी’ बताकर उसके ‘सेक्स स्कैंडल’ की झूटी कहानी गढ़ी थी जो तमाम अख़बारों और न्यूज़ चेनलों ने दिखाई थी. और अभी हाल ही में ताजा मामला ‘असदुद्दीन ओवैसी की रैली’ में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगने का था जोकि सोशल एक्टिविस्ट लोगों ने दुसरे ही दिन इनका झूट उजागर कर दिया था.

गौरतलब है की जब संपूर्ण भारत के अलग-अलग राज्यों से विभिन्न आश्रमों में इनके उनके संचालकों फर्जी बाबाओं द्वारा सिर्फ जवान लड़कियों को बंधक बनाने और उनसे बलात्कार करने के मामले सामने आने लगे और इन ढोंगी बाबाओं की रंगरलिया पकड़ी जाने के बाद ये ‘इस्लाम विरोधी मीडिया’ ने अपनी औकात दिखाना शुरू कर दी.

ध्यान रहे आपको मीडिया के इस घटिया प्रोपगंडे से बचने की ज़रुरत है  जो एक ‘गर्ल्स हास्टल’ को “मदरसा” कह कर ये लोग अपने रेह्नुमानों के पालतू बाबाओं को बचाने के लिए इस तरह का प्रोपोगेन्डा रच रहे हैं. इन आश्रमों से लड़कियों  को नेताओं और बढे उध्ध्योग्पतियों को खुश करने उनका बिस्तर गर्म करने के लिए इस्तेमाल किया जता रहा है अगर इसका काला सच बहार निकलकर आया तो इस देश के ना जाने कितने सफेदपोश बेनकाब होंगे इसका अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल है.

लखनऊ से एक सोशल एक्टिविस्ट सलमान शेख अपनी फेसबुक पर लिखते हैं

मैं लखनऊ से हूँ ! बात ये है कि मदरसे के जो संस्थापक हैं (उन्ही की ज़मीन भी है) , उनको शक़ हुआ कि जिस आदमी को उन्होंने मदरसे में पढ़ाने के लिए रखा है, वो कब्ज़ा करना चाहता है ! उसने होस्टल टाइप भी शुरू कर दिया जो कि नहीं होना चाहिए ! उसको ठिकाने लगाने के लिए ये ड्रामा किया गया ! सीधी उँगली से घी नहीं निकल रहा था तो उंगली टेढ़ी कर ली गयी ! बाकी मीडिया की बकवास एक झूठे प्रोपगेंडे से ज़्यादा कुछ नही है !

लखनऊ से यह खबर आने के बाद से ही लोगों ने सोशल मीडिया पर इस बारे में काफी बहस की है और सभी तरह की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं. एक फेमस सोशल एक्टिविस्ट जिनका नाम ‘शादान अहमद’ इन्होने इस खबर की काढ तक जाकर पता लगाया की सच क्या है.

शादान अहमद अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखते हैं

मदरसों में तो उनको कुछ मिल नही पाता, तुफान मचा नही पा रहा. अब यह मीडिया वाले एक ‘PG’ को मदरसा क्यूँ बताया,यह तो अाप समझ ही गयी होंगे . मीडिया का one point agenda दिन रात का एक ही है इस्लाम से नफरत पैदा करना. जिस तरह से अाप का कोई नेता नही है वैसा ही आपके फेवं में कोई बड़ा TV मीडिया अाप के पास नही है जो सच दिखा के इनको बेनकाब कर पाये.

लोगों ने पहले ही आगाह किया था जिस रफतार से ब्रह्ममण बाबा लोग अश्रामों में धरा रहे हैं इनको बैलन्स बनाने के लिएे किसी ना किसी मुल्ले की गर्दन जल्दी चाहिए, या कोई मदरसा टार्गेट हो सकता है. लखनऊ में मुफ्ती पर इलजाम लगाया गया है पिटायी का, मगर मामला बाबाओं के बराबार करने के लिएे पुरी तरह से यौन शोषन का बना के दिखा दिया गया है, जबकी उसी मदरसे में खाना बनाने वाली औरत जो रोज़ मदरसे जाती थी साफ कह रही है हमने कभी ऐसा नही देखा.  जिन की बच्चियां पढती थीं उनकी माँ कह रही है हमारी बच्चियों ने कभी ऐसी शिकायत नही की.

बाबाओं के आश्रम को तो पुलिस घेर कर कितने दिन रखती थी, अंदर से गोली चलती थी यहाँ तो किसी लड़की ने छत से प्रताड़न होने का खत गिराया (रेप की शिकायत ही नही है ,बुरे व्यवहार की शिकायत है ) तो खबर मिलते ही मदरसे के मालिक और अन्य लोक़ल मुस्लिम ने पुलिस को बुलाया और मुफ्ती साहब को गिरफ्तार करवाया .यह बुनियादी फर्क है मानसिकता का, दूसरा एंगल जो आ रहा है जैसा लखनऊ के लोकल लोग जो वहां रहते हैं वो ये बता रहे हैं के ज़मीन का मामला है, ज़मीन के मालिक को ज़मीन वापस चाहिए थी और इसीलिए से सारा झोल रचा.

सोशल एक्टिविस्ट मोहम्मद जाहिद अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखते हैं

भाँड तो भाँडगिरी ही करेगा। बनियाओं के स्वामित्व वाली भाँड मीडिया वही कर रही है। खबर है कि गर्ल्स हास्टल संचालक का हास्टल की फीस को लेकर छात्राओं से विवाद चल रहा था जिसके कारण यह विवाद पैदा हुआ और उस संपत्ती के मालिक की शिकायत पर ही पुलिस ने कार्यवाही की।

विवाद संपत्ती का है , और हम मुसलमान इतना तो जानते ही हैं कि जिन मदरसे में बच्चियाँ रहती हैं उसका इंतज़ाम मर्द नहीं औरतें ही करती हैं। जिनको बाजी कहा जाता है , मर्द तो उधर फटक भी नहीं सकता। कीड़े पड़ेंगे ऐसे झूठे आरोप लगाने वालों। ( और इन्होने अपने इलाके में लोगों से इस बिकाऊ मीडिया के खिलाफ FIR दर्ज कराने की अपील भी की है )