क़िस्सा: हज़रत खालिद बिन वलीद रज़ीo के सामने एक चुड़ैल उन्हें क़त्ल करने आयी…

फ़तेह मक्का के बाद हज़रत मुहम्मद सल्लo ने खाना-ए-काबा में मौजूद तमाम बुतों को तोड़ दिया लेकिन वादी-ए-नख्ला में मौजूद कुरैश का सबसे अज़ीज़ बुत ओज्ज़ा अब तक वहां मौजूद था और उसकी इबादत भी इसी जोर शोर से जारी थी.

चुनांचे ओज्ज़ा के बुत को तोड़ने के मकसद से हज़रत मुहम्मद सल्लo ने हज़रात खालिद बिन वलीद राज़िल्लाहो ताला अन्हो को मुन्तखिब फ़रमाया और 30 सवारों के साथ वादी-ए-नख्ला की तरफ रवाना किया याद रहे कि ये वही खालिद बिन वलीद हैं जिन्हें इस्लाम का सबसे बड़ा सिपहसलार तस्लीम किया जाता है.

और खुद अल्लाह के रसूल ने इन्हें सैफुल्लाह यानी अल्लाह की तलवार का लकब दिया था. इस बार खालिद बिन वलीद रज़ीo का मुकाबला किसी फ़ौज से नहीं बल्कि एक ऐसी शैतानी कूवत से था की जिसकी हकीक़त अल्लाह और इसके रसूल ही बेहतर जानते थे की वो असल में क्या थी.

फ़तहे मक्का के कुछ रोज़ बाद यानी 25 रमजान के दिन अल्लाह के रसूल सल्लाo ने हज़रत खालिद बिन वलीद को बुलाकर ये हुक्म दिया कि वादी-ए-नख्ला के दरख्तों की तरफ जाओ तुम्हे वहां तीन झाऊ के पेड़ मिलेंगे तुम वहां जाकर पहले दरख़्त को काट देना हज़रत खालिद बिन वलीद आप सल्लाo के हुक्म पर नख्ला की तरफ रवाना हुए वहां मौजूद झाऊ के पहले दरख़्त को काट दिया.

पेड़ काटने के बाद जब हज़रत खालिद बिन वलीद वापस आये तो आप सल्लाo ने आपसे पूछा क्या तुझे वहां कुछ दिखायी दिया था इस पर हज़रत खालिद बिन वलीद ने जवाब दिया कि नहीं कुछ भी नहीं इस जवाब पर आप सल्लाo ने फ़रमाया कि वापस जाओ और दूसरे दरख़्त को भी काट दो.

हज़रत खालिद बिन वलीद ने वहां जाकर दूसरा पेड़ भी काट दिया और फिर वापस आये तो आप सल्लाo ने इनसे वही सवाल किया कि तुम्हे कुछ दिखा इस पर हज़रत खालिद बिन वलीद ने कहा की नहीं कुछ भी नहीं दिखा ये जवाब सुनकर आप सल्लाo ने कहा कि वापस जाओ और तीसरा पेड़ भी काट दो.

इस बार जब हज़रत खालिद बिन वलीद इस पेड़ को काटने के लिए नख्ला पहुंचे तो देखा कि एक शैतान औरत बरहना हालत में बाल फैलाये हुए है और गुस्से में अपने दांत पीस रही है इसके पीछे ओज्ज़ा के मंदिर का मुहाफ़िज़ दुबय्या सुल्मी चला आ रहा था.

दुबय्या ने जब हज़रत खालिद बिन वलीद को देखा तो चिल्लाया ऐ ओज्ज़ा खालिद पर जोर से हमला करो और पीछे न हटो ओढ़नी उतार डालो क्योंकि अगर आज तुमने खालिद को क़त्ल न किया तो तू ज़िल्लत की मुस्ताहिक हो जाएगी ये सुनकर हज़रत खालिद बिन वलीद ने कहा कि ऐ ओज्ज़ा मैं तेरा इनकार करता हूँ.

तुझे पाक नहीं मानता मैं देख रहा हूँ की अल्लाह ने तुझे ज़लील कर दिया है ये कह कर हज़रत खालिद बिन वलीद ने तलवार से इसके सर पर जोर से वार किया इस वार के बाद देखा तो वो शैतान सिफत औरत कोयला बनी हुई थी फिर हज़रत खालिद बिन वलीद ने इस दरख़्त को काट दिया और मंदिर के मुहाफ़िज़ दुबय्या को भी क़त्ल कर दिया.

इसके बाद हुज़ूर सल्लाo की खिदमत में हाज़िर होकर ये सारा किस्सा सुनाया जिसके बाद हुज़ूर सल्लाo ने फ़रमाया ये ओज्ज़ा थी अब आइन्दा अरबो में कोई ओज्ज़ा न होगी और इसकी इबादत की जायेगी वो दिन और आज का दिन है की अरबो में कोई भी इस बुत का नाम लेवा भी न रहा.